हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं, जिनमें ज्यादातर यात्री ऑनलाइन टिकट बुक करवाते हैं. अक्सर ऐसा होता है कि टिकट बुक करने के बाद कंफर्म नहीं होता और वेटिंग में चला जाता है. आम तौर पर ऐसी स्थिति में IRCTC टिकट को ऑटोमैटिक कैंसिल कर देता है और यात्रियों के खाते में रिफंड भेज दिया जाता है.
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक महिला यूजर के साथ कुछ अलग हुआ. उन्होंने बताया कि उन्होंने टिकट खुद कैंसिल नहीं किया, फिर भी उनसे कैंसिलेशन चार्ज काट लिया गया. इस घटना के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल उठा कि अगर टिकट खुद-ब-खुद रद्द हो जाए, तब भी क्या चार्ज देना पड़ता है? आइए समझते हैं पूरा नियम.
क्या है नियम?
अगर आपकी टिकट वेटिंग लिस्ट में रह जाती है और ट्रेन का चार्ट बनने तक कन्फर्म नहीं होती, तो IRCTC उसे अपने आप कैंसिल कर देता है. ऐसे में कोई भी कैंसिलेशन चार्ज नहीं लगता और पूरा पैसा सीधे आपके अकाउंट में रिफंड कर दिया जाता है.
वहीं, ई-टिकट की स्थिति में भी यही नियम लागू होता है. यात्री को खुद कुछ करने की जरूरत नहीं होती, सिस्टम ऑटोमैटिक प्रक्रिया पूरी कर देता है. हालांकि, तत्काल टिकट के मामलों में अलग नियम हैं. यदि तत्काल टिकट कन्फर्म नहीं होती, तो कुछ क्लर्केज चार्ज कट सकता है.
कब देना पड़ता है कैंसिलेशन चार्ज?
अगर यात्री खुद से टिकट रद्द करता है तो रेलवे के नियमों के अनुसार चार्ज देना अनिवार्य होता है. चार्ज की राशि टिकट के क्लास और ट्रेन के समय के हिसाब से तय की जाती है.
- स्लीपर क्लास के लिए लगभग 120 रुपये
- सेकंड एसी के लिए 200 रुपये
- फर्स्ट एसी के लिए 240 रुपये तक चार्ज लगाया जा सकता है.
यदि टिकट सफर से 48 घंटे पहले कैंसिल की जाए तो पूरा चार्ज लागू होता है. इसके बाद धीरे-धीरे रिफंड की राशि घटती जाती है. वहीं, अगर वेटिंग टिकट को चार्ट बनने से पहले रद्द किया जाए तो बहुत कम पैसे कटते हैं, लेकिन चार्ट बनने के बाद टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड नहीं मिलता.
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