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1 घंटे में डिशवॉशर कितनी बिजली खा जाता है? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप!

On: November 15, 2025 11:33 AM
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घर में रोजाना बर्तन धोने की परेशानी को कम करने के लिए लोग तेजी से डिशवॉशर की ओर रुख कर रहे हैं. यह मशीन न सिर्फ समय बचाती है, बल्कि हाथ से धोने की तुलना में लगभग नौ गुना कम पानी खर्च करती है. गर्म पानी और डिटर्जेंट की वजह से बर्तनों की सफाई भी ज्यादा बेहतर होती है. हालांकि कई लोग यह जानना चाहते हैं कि डिशवॉशर आखिर कितनी बिजली खाता है और क्या इससे बिजली बिल बढ़ सकता है.

एक घंटे में कितनी बिजली होती है खर्च?

Schneider Electric Blog की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि बाजार में मिलने वाले अधिकतर डिशवॉशर 1800 वाट के होते हैं. इसे एक घंटे चलाने पर लगभग 1.8 kWh बिजली खर्च होती है. अमेरिका में जहां प्रति यूनिट बिजली की औसत कीमत 14–16 सेंट है, वहां हफ्ते में पांच दिन एक-एक घंटे चलाने पर करीब 1.44 डॉलर (लगभग ₹120) का खर्च आता है.

रिपोर्ट के मुताबिक नए मॉडलों की रनिंग टाइम 1 घंटे से बढ़कर कई बार 4 घंटे तक हो जाती है. ऐसे में खर्च चार गुना बढ़ जाता है. अनुमान के अनुसार हफ्ते में करीब 10 डॉलर (₹800) और महीने में लगभग 40 डॉलर (₹3,500 से ज्यादा) तक का बिजली बिल आ सकता है. भारत में जहां बिजली दर सामान्यतः ₹5–₹8 प्रति यूनिट रहती है, वहां बिल इसी अनुसार तय होगा.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

विशेषज्ञों का कहना है कि डिशवॉशर की उम्र और तकनीक उसकी बिजली खपत पर बड़ा असर डालती है. पुराने मॉडल ज्यादा बिजली लेते हैं, जबकि एनर्जी स्टार रेटेड आधुनिक मशीनें कम बिजली पर बेहतर परफॉर्म करती हैं.

पूरी तरह भरकर ही चलाएं डिशवॉशर 

बिजली बचाने के लिए एक्सपर्ट यह सलाह भी दे रहे हैं कि डिशवॉशर को पूरी तरह भरकर ही चलाएं, जिससे पानी और बिजली दोनों की बचत होती है. इसके साथ ही ड्राई मोड को बंद रखना चाहिए, क्योंकि हीटिंग एलिमेंट सबसे ज्यादा बिजली खाता है. बर्तनों को दरवाजा खोलकर हवा से सुखाने पर खर्च काफी कम हो जाता है.

मेंटेनेंस को लेकर इन बातों का रखें ध्यान

मेंटेनेंस को लेकर भी रिपोर्ट में दो खास बातें कही गई हैं. पहली कि मशीन के दरवाजे की रबर सील को साफ रखें. यहां फफूंद जमा होने पर पानी लीक हो सकता है, जिससे मशीन खराब होने का खतरा होता है. दूसरी कि स्प्रे आर्म के छोटे छेदों को हर महीने साफ करें, क्योंकि इनमें फंसे खाने के कण पानी के दबाव को कम कर देते हैं और बर्तन ठीक से साफ नहीं होते.

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तविषी देवरानी

लेखन मेरे लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि पाठकों से दिल से जुड़ने का जरिया है। मेरा नाम तविषी देवरानी है और मैं देवों की नगरी, देवभूमि उत्तराखंड से हूं। आजकल के टेक-फ्रेंडली माहौल में मैं अपने लेखों के माध्यम से पाठकों को ऐसा अनुभव और विचार साझा करना चाहती हूं, जो शायद उन्होंने पहले कभी सोचा न हो। मैं 9वीं कक्षा से टेक की दुनिया से जुड़ी हुई हूं। मेरा लेखन का सफर वीडियो एडिटिंग से शुरू हुआ, और पिछले 1 साल से मैं सक्रिय रूप से अपने अनुभवों और विचारों को लेखन के जरिए साझा कर रही हूं।

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