चीन को साइबर अपराध पर शिकंजा कसने में बड़ी सफलता मिली है. चीनी मूल के कारोबारी शी झिजियांग को लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद थाईलैंड से चीन भेज दिया गया है. झिजियांग पर एशिया के सबसे बड़े ऑनलाइन जुआ और धोखाधड़ी नेटवर्क का सरगना होने का आरोप है, जिसकी वजह से पूरे क्षेत्र में हजारों लोग ठगे गए. इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे 2022 में बैंकॉक में पकड़ा गया था. कंबोडियाई पासपोर्ट रखने के बावजूद चीन उसे वापस लाना चाहता था, और थाई कोर्ट ने दो साल की सुनवाई के बाद प्रत्यर्पण की मंजूरी दी.
शी झिजियांग पर गंभीर आरोप
द 420 की रिपोर्ट के मुताबिक, झिजियांग ने सिर्फ ऑनलाइन जुआ ही नहीं चलाया, बल्कि 200 से ज्यादा अवैध जुआ प्लेटफॉर्म का संचालन किया, जिनसे अरबों युआन का गैरकानूनी लेनदेन हुआ. उसका सबसे विवादित प्रोजेक्ट ‘Shwe Kokko City’ था, जिसे बाहर से स्मार्ट सिटी बताया जाता था, लेकिन जांच में पता चला कि यह अवैध कैसिनो, नकली निवेश योजनाओं और ऑनलाइन धोखाधड़ी का बड़ा ठिकाना था.. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों लोगों को यहां जबरन लाकर साइबर फ्रॉड करवाया जाता था.
चीन का सख्त रवैया
चीनी सरकार ने झिजियांग की वापसी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी जीत माना है. चीन की मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक सिक्योरिटी के अनुसार, यह कार्रवाई उन साइबर अपराधी गिरोहों को चेतावनी है जो चीनी नागरिकों को ऑनलाइन जुए और फ्रॉड में फंसाते हैं. 2020 से चीन सीमा पार जुआ और टेलीकॉम धोखाधड़ी के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है, जिसके तहत कंबोडिया, लाओस और म्यांमार से हजारों लोगों को पकड़ा जा चुका है.
अमेरिका में भी था निगरानी में
2025 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने झिजियांग से जुड़ी कई कंपनियों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए थे. अमेरिका ने उसे दक्षिण-पूर्व एशिया में मानव तस्करी, साइबर फ्रॉड और हिंसा फैलाने वाले नेटवर्क का हिस्सा बताया था. ट्रेजरी के अंडर सेक्रेटरी जॉन हर्ली ने कहा था कि ऐसे आपराधिक गिरोह लोगों की जीवनभर की कमाई छीन लेते हैं और मानव तस्करी को बढ़ावा देते हैं.
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